Depression in Hindi | डिप्रेशन हिंदी में
मानव शरीर में होने वाले अनेक रोगों में डिप्रेशन होना एक मुख्य बीमारी है। आज की भागदौड़ की जिंदगी में इंसान खुश रहना ही भूल गया है और अपने मस्तिष्क पर काबू पाना उसके लिए बहुत की कठिन प्रतीत होता है।
सफलता के पीछे भागते भागते मनुष्य उसके बीच में आने वाले अड़चनों के बारे में सोचता ही नहीं है और जब उसे असफलता का सामना करना पड़ता है तब वह बहुत ही घबरा जाता है और अपना आपा खो देता है।
आज के दौर में मुख्यत युवाओं में डिप्रेशन की समस्या बहुत अधिक पाई गई है। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे कि असफल होना, जीवन में स्नेह की कमी, उम्मीद के मुताबिक किसी काम का न होना, इत्यादि।
सरल भाषा में हर वह चीज डिप्रेशन का कारण हो सकती है जो मनुष्य के अनुमान के अनुसार ना हो।
Depression in Hindi | डिप्रेशन हिंदी में:
डिप्रेशन के बारे में नीचे एक विस्तृत वर्णन अंकित है, कृपया ध्यानपूर्वक पढ़ें।
डिप्रेशन या अवसाद क्या है?
मनोविज्ञान के क्षेत्र में डिप्रेशन का तात्पर्य मनोभावों से संबंधित दुखों के कारण होता है। मनोविज्ञान में डिप्रेशन को अवसाद का नाम भी दिया गया है।मनुष्यों में यह अवस्था अधिकांश प्रेम संबंधों के वजह से गंभीर होता है मनोवैज्ञानिको ने इसके पीछे का राज यह बताया है कि व्यक्ति के जीवन-काल में उनका सबसे ज्यादा लगाव अपने जीवन साथी के प्रति होता है।
मनोचिकित्सकों का मानना है कि मनुष्य के जीवन काल में यह एक ऐसा अवस्था है जिसमे वह खुद को अकेला,लाचार और हारा हुआ महसूस करता है ऐसी परिस्थिति में उस व्यक्ति-विशेष को अपने चारों तरफ निराशा,अशांति,अरुचि व तनाव जैसा प्रतीत होता है।
ऐसे में उसे सारे खुशी,सुख,शांति,संबंध यह तक सफलता भी बेमानी लगती है।ऐसा होने के अनेक भौतिक कारण हो सकते हैं जैसे कि कुपोषण,नशा करना,हार्मोन के कारण,अप्रिय जगह पर लंबे समय तक रहने के कारण,कई बार किसी बीमारी से ग्रस्त रहने के दरमियान में भी ऐसा हो सकता है कुछ लोगों में ऐसा नींद की कमी के कारण से भी पाया गया है।
डिप्रेशन कई बार लोगों के सोच पर भी निर्भर करता है वो क्या सोचते हैं कैसा सोचते हैं। अगर कभी ऐसा अनुभव हो कि परिवार का कोई सदस्य सांत या गुमसुम बैठा है या निराशावादी बातें करता है तो उसे जल्द से जल्द किसी मनोचिकित्सक से दिखलायें क्योंकि डिप्रेशन की मरीजों में ऐसा देखा गया है कि वो आत्महत्या तक करने की प्रस्थिति में आ जाते हैं।
आम तौर पर यह बीमारी कुछ समय के बाद खुद हि ठीक होजाता है परंतु कुछ लोगों में ऐसा नही होता है यह रोग ह के जीवन मे अशांति,दुख,तनाव,दर्द और कई कठिनाइयां भर देती है।
डिप्रेशन या अवसाद के कारण:
डिप्रेशन का अभी तक कोई सटीक कारण ज्ञात नहीं हो पाया है ऐसा इसलिए क्योंकि ये रोग मनुष्य को उसके अपने सोच या व्यक्तित्व के कारण उत्पन्न होता है। परंतु कुछ ऐसे सामान्य कारण हैं जिनकी वजह से आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।ये कारण कौन कौन से हैं आइये इसके बारे में जानते हैं
- कई लोगों में यह समस्या अनुवांशिक कारण यानी जेनेटिक प्रॉब्लम के कारण उत्पन्न होती है
- कुछ लोगों में ऐसा पाया गया है कि उनमें ऐसी समस्या दिमागी बदलाव के कारण हुई है और शरीर में हार्मोन के असंतुलन के वजह से वैसे व्यक्ति विशेष डिप्रेशन के मरीज बन जाते हैं
- कई बार ऐसा उस व्यक्ति विशेष के जीवन में प्रतिदिन मिलने वाले तनाव के कारण भी होता है
- प्रतिदिन एक ही जैसा काम होना जैसे कि किसी कार्य में एक ही प्रकार का बाधा हर रोज होना,शादी जैसे मामलों में अथवा पढ़ाई जैसे कई ऐसी छोटी छोटी बातों से भी डिप्रेशन की उत्तपत्ति हो सकती है।
- अगर आप अधिक नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं तो ये एक अहम वजह है आपके डिप्रेशन से ग्रस्त होने का
- कुछ लोग अपने परिवार में चल रहे रोजाना के आर्थिक तनाव या किसी की बीमारी को लेकर अधिक चिंतित रहने लगते हैं जिससे कि वो डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं
डिप्रेशन या अवसाद के लक्षण:
अगर डिप्रेशन की लक्षण के बारे में बात करें तो प्रकार के आधार पर ये बहुत सारे होते हैं।ये आपकी सोच को प्रभावित करता है आपको शारीरिक रूप से कमजोर तक कर सकता है डिप्रेशन के ऐसे कई लक्षण हैं चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं
- थका हुआ महसूस होना
डिप्रेशन की अवस्था में आपके शरीर को उचित रूप से आराम नहीं मिल पाता है जिसके कारण आप अपनी दिनचर्या के छोटे छोटे कार्य भी करने में खुद को असमर्थ महसूस करते हैं इसमें आपको किसी भी कार्य करने में पहले जैसी रुचि नहीं रहती है।इन सब के पश्चात आप खुद को थका हुआ महसूस करते हैं।कई बार किसी बात को बार बार सोच कर चिंतित रहना भी इसका कारण बनता है।
- उदास रहना
डिप्रेशन से ग्रस्त रहने के दरमियाँ आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में आराम नहीं मिल पाता है।उदास रहने के पीछे की वजह यह है कि आपके शरीर को पर्याप्त आराम न मिलने के कारण शरीर में हार्मोन का स्तर ऊपर नीचे होने लगता है जिससे आप टूटा हुआ या उदास महसूस करते हैं।
- बेचैनी होना
जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन से ग्रस्त रहता है तब उसके शरीर को उचित आराम या नींद नही मिल पाता है जिससे कि और नींद संबंधी रोग उत्पन्न होते है जो कि बेचैनी का कारण बनते हैं।कई बार ऐसे रोगों की उत्पत्ति एक ही विषय पर लंबे समय तक चिंतित रहने के कारण भी हो सकती हैं।
डिप्रेशन के मुख्य कारण जैसे नशा करना ये भी बेचैनी का कारण होता है।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लोग सोचे वक़्त किसी बात पर ज्यादा चिंतित रहते हैं जिसके कारण की वो बेचैन हो जाते हैं और छोटे कारणों में किसी बात पर भय से भी बैचैनी सा लगता है।
- व्यवहार में चिड़चिड़ापन आना
डिप्रेशन चिड़चिड़ापन की उत्तपत्ति का एक अहम कारक है।ऐसा होने के पीछे कई मानसिक एवं शारीरिक कारण हो सकते हैं जैसे कि अधिक तनाव में रहना या किसी बात पर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहना,सही तौर पर शरीर को आराम न मिलना या फिर नींद की कमी भी चिड़चिड़ापन का कारण बनता है।
अगर आप नसिली पदार्थों का सेवन करते हैं तो ये चिड़चिड़ापन का एक उचित कारण है। किसी बात पर अधिक विचार या भय भी चिड़चिड़ापन पैदा करता है।इसे एक बहुत ही विकट परिस्थिति माना जाता है इसलिए यदि आपके परिवार के किसी सदस्य में या दोस्तों में ऐसे व्यवहार दिखे तो मनोचिकित्सक से समय रहते राय सलाह लें।
- सोचने में अथवा किसी निर्णय लेने में कठिनाइयां आना
अगर आपको किसी भी निर्णय या फैसला लेने में कठिनाई आती है तो यह संभव न कि आप किसी मानसिक रोग से ग्रस्त हैं इसमे डिप्रेसन होने की संभावना अधिक है।इसमें आप कोई भी निर्णय सही से नही ले पाते क्योंकि ऐसी प्रस्तिथि में आपके दिमाग कोई विषेस बात चल रही होती है और आप कुछ और सोचना चाहते हैं परंतु ऐसा करने में असमर्थ रहते हैं।
जब कभी कोई वयक्तिविशेष ऐसी मानसिक रोग से ग्रस्त होता है तब ये देखा गया है कि उसे सर में अधिक दर्द का अनुभव होता है तथा वह काफी मायुष नज़र पड़ता है।
- खुद को अपराधी मानना
अगर आप डिप्रेशन से ग्रस्त हैं तो आप हर जगह खुद को ही गलत समझेंगे। यह एक ऐसी मानसिक गतिविधि है जिसमें आप हर परिस्थिति या गलती में खुद को ही अपराधी समझने लगते हैं।
यह बहुत ही विकट व प्राणघातक परिस्थितियों में से एक माना जाता है इसमें अधिकांश मरीज खुद को अपराधी मान कर आत्महत्या कर लेते हैं इसमें आपका दिमाग उचित सोचने में असमर्थ हो जाता है और आप हर तरफ से खुद को ही गलत समझने लगते हैं।
- मानव शरीर में डिप्रेशन का अन्यो लक्षण
डिप्रेशन आपके महसूस करने के तरीके को प्रभावित करता है और आपके शरीर में बदलाव भी ला सकता है। प्रमुख अवसाद (अवसाद का एक अधिक उन्नत रूप) को एक गंभीर चिकित्सा स्थिति माना जाता है जिसका आपके जीवन की गुणवत्ता पर नाटकीय प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्रीय स्नायुतंत्र:
अवसाद केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के भीतर बहुत सारे लक्षण पैदा कर सकता है, जिनमें से कई को खारिज करना या अनदेखा करना आसान है।
वृद्ध वयस्कों को भी संज्ञानात्मक परिवर्तनों की पहचान करने में कठिनाई हो सकती है क्योंकि “बड़े होने” से संबंधित अवसाद के संकेतों को खारिज करना आसान है।
अवसाद के लक्षणों में अत्यधिक उदासी, शोक और अपराधबोध की भावना शामिल है। इसे खालीपन या निराशा की भावना के रूप में वर्णित किया जा सकता है। कुछ लोगों को इन भावनाओं को शब्दों में बयां करना मुश्किल हो सकता है।
उनके लिए यह समझना भी मुश्किल हो सकता है क्योंकि लक्षण प्रकट हो सकते हैं और शारीरिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकते हैं। रोने का बार-बार आना अवसाद का लक्षण हो सकता है, हालाँकि हर कोई जो उदास है वह रोता नहीं है।
आप भी हर समय थकान महसूस कर सकते हैं या रात को सोने में परेशानी हो सकती है। अन्य लक्षणों में शामिल हैं: चिड़चिड़ापन, क्रोध, और उन चीजों में रुचि का नुकसान जो आनंद लाते थे, जिसमें सेक्स भी शामिल है।
अवसाद सिरदर्द, शरीर में पुराने दर्द और दर्द का कारण बन सकता है जो दवा का जवाब नहीं दे सकता है। यह कभी-कभी कुछ न्यूरोलॉजिकल रोगों का भी प्रभाव होता है, जैसे अल्जाइमर रोग, मिर्गी, और मल्टीपल स्केलेरोसिस।
अवसाद से ग्रस्त लोगों को सामान्य कार्यसूची बनाए रखने या सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है। यह ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, स्मृति समस्याओं और निर्णय लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों के कारण हो सकता है।
कुछ लोग जो उदास हैं, वे शराब या नशीली दवाओं की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे लापरवाह या अपमानजनक व्यवहार की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
हो सकता है कि अवसाद से ग्रस्त कोई व्यक्ति जानबूझकर इसके बारे में बात करने से बच रहा हो या समस्या को छिपाने की कोशिश कर रहा हो। अवसाद का अनुभव करने वाले लोग खुद को मौत या खुद को चोट पहुंचाने के विचारों में व्यस्त पा सकते हैं।
पाचन तंत्र:
जबकि अवसाद को अक्सर एक मानसिक बीमारी के रूप में माना जाता है, यह भूख और पोषण में भी भारी भूमिका निभाता है। कुछ लोग अधिक खाने या द्वि घातुमान से सामना करते हैं। इससे वजन बढ़ सकता है और मोटापे से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं, जैसे टाइप २ मधुमेह।
आप पूरी तरह से अपनी भूख भी खो सकते हैं, या सही मात्रा में पौष्टिक भोजन खाने में असफल हो सकते हैं। वृद्ध वयस्कों में खाने में रुचि की अचानक कमी से जेरियाट्रिक एनोरेक्सिया नामक स्थिति हो सकती है।
खाने की समस्याओं से ऐसे लक्षण हो सकते हैं जिनमें शामिल हैं:
- पेट का दर्द
- ऐंठन
- कब्ज़
- कुपोषण
यदि कोई व्यक्ति सही आहार नहीं लेता है तो इन लक्षणों में दवा से सुधार नहीं हो सकता है। मिठाई और कार्बोहाइड्रेट में उच्च खाद्य पदार्थ तत्काल राहत प्रदान कर सकते हैं, लेकिन प्रभाव अक्सर अस्थायी होते हैं।
अवसाद का अनुभव होने पर स्वस्थ आहार बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करने के लिए पोषक तत्व आवश्यक हैं कि शरीर के न्यूरोट्रांसमीटर सही तरीके से फायरिंग कर रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, सबसे आम विटामिन और पोषक तत्वों की कमी है।
- ओमेगा -३ फैटी एसिड
- बी विटामिन
- खनिज
- अमीनो अम्ल
हृदय और प्रतिरक्षा प्रणाली:
अवसाद और तनाव का गहरा संबंध है। तनाव हार्मोन हृदय गति को तेज करते हैं और रक्त वाहिकाओं को कसते हैं, जिससे आपका शरीर लंबे समय तक आपात स्थिति में रहता है। समय के साथ, यह हृदय रोग का कारण बन सकता है।
हृदय संबंधी समस्याओं की पुनरावृत्ति अन्य स्थितियों की तुलना में अवसाद से अधिक निकटता से जुड़ी हुई है जैसे:
- धूम्रपान
- मधुमेह
- उच्च रक्तचाप
- उच्च कोलेस्ट्रॉल
अवसाद और तनाव का प्रतिरक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आप संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। एक समीक्षा ने अध्ययनों को देखा और पाया कि सूजन और अवसाद के बीच एक संबंध प्रतीत होता है, हालांकि सटीक संबंध स्पष्ट नहीं है।
सूजन कई बीमारियों से जुड़ी होती है, जैसे तनाव। कुछ विरोधी भड़काऊ एजेंटों ने अवसाद के साथ कुछ लोगों को लाभान्वित करने के लिए दिखाया है।
डिप्रेशन के उपचार:
डिप्रेशन एक चिंतनीय मानसिक बीमारी है जिसका प्रकार के आधार पर उपचार किया जा सकता है।कुछ परिस्तिथियों में इसका इलाज दवाओं से किया जाता है परंतु कुछ में रोगी को विस्वाश दिलाना पड़ता है और दिलासा दिया जाता है कि वह बिल्कुल दोसी नही है जिससे उसका तनाव कम होता है और डिप्रेशन जैसी प्रस्तिथि से उभरने में मदद मिलती है।कुछ उपचार नीचे उल्लेखित किये गए हैं
- जैसा कि हम लोग जानते हैं डिप्रेशन में व्यक्ति खुद को अकेला और लाचार समझता है इसलिए ऐसे वक्त में ये जरूरी है कि उसे सभी लोगों का समर्थन दिया जाए उसे ऐसा विश्वास दिलाया जाए कि सभी लोग उसके साथ हैं उसके साथ अच्छे से अच्छा व्यवहार किया जाए ऐसा करने से उसे यह प्रतीत होगा कि वह अकेला नहीं है उसके साथ सभी लोग हैं और ये विधि उसे अच्छा महसूस कराएगा तथा उसे तनाव से दूर रहने में मदद करता है।ऐसी परिस्थितियों में रोगी को कभी अकेला नही छोड़ना चाहिये इस बात का जरूर ध्यान रखें।
- डिप्रेशन से ग्रस्त वयक्ति को उभरने में मदद करने के लिए कई प्रकार के थेरेपी हैं जिनके उचित उपयोग से उन्हें ठीक किया जा सकता है जैसे साइकोथैरेपी में टॉकिंग यह मरीज़ की सोचने समझने की चरण सिमा तथा उसके विचारों और बातों पर आधारित होता है।दूसरा प्रयोग किया जाने वाला थेरेपी है इंटरपर्सनल थेरेपी,इसमे डिप्रेस्ड वयक्ति से यह पता लगाया जाता है कि वह अपने रिश्तों में किस प्रकार शामिल है कई बात मरीज खुद को बीमार समझ के बैठ जाता है यही बात उसके अंदर के तनाव का कारण होता है।
- डिप्रेशन से मुक्त होने के लिए कुछ दवाओं का प्रयोग भी किया जाता है जिससे आपको तनाव से राहत मिलती है साथ ही साथ अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में व्यायाम जरूर रखें और प्रतिदिन संतुलित आहार का सेवन बहुत जरूरी है।
डिप्रेशन से बचने के लिए क्या करें:
डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति विशेष का खुद के साथ गलत करने का डर ज्यादा रहता है इसलिए उच्चित है कि इससे खुद को ज्यादा से ज्यादा बचाने की कोशिश ही कि जाए इसका सबसे उचित उपाय है कि तनाव से दूरी बरकरार रखें किसी बात को लेकर ज्यादा लंबे समय तक ना सोचें ।इसके कई अनेक उपाय हैं आइये इसके बारे में जानते हैं
- जब कभी आपको तनाव या अवसाद महसूस होने लगे तो अपने दिमाग को तनाव रहित व शांत रखने के लिए मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमेशा मधुर संगीत का सहारा लें उदास गानों को बिल्कुल मत सुनें यह आपको तनाव दे सकते हैं।मधुर व खुशी वाले संगीत आपको डिप्रेशन से राहत दिला सकते हैं।
- नियमित तौर पर नींद न लेने के कारण भी डिप्रेशन का डर रहता है इसलिए ऐसी गलतियां ना करें और नींद पूरी लें ।अपनी आदतों में रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत भी शामिल करें और कभी भी सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग बिल्कुल भी नही करें क्योंकि ऐसा करने से तनाव का उत्पन्न होता है।
- डिप्रेशन से दूर रहने के लिए सिर्फ वैसे ही कार्य करें जिसमे आपकी रुचि अधिक हो और जो काम आपको पसंद हो।ऐसे वक्त में आप धार्मिक पुस्तक या भजन सुनकर भी अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं जिससे आपको डिप्रेशन से दूर रहने में मदद मिलती है।
- डिप्रेशन से दूर रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि आपका शरीर मजबूत रहे और आपका दिमाग भी स्वस्थ रहे क्योंकि स्वस्थ दिमाग से हिं स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है।ऐसा करने के लिए आपको नियमित रूप से सुबह शाम टहलना चाहिए और योग,व्यायाम भी करना चाहिए इससे आपका शरीर स्वस्थ व मजबूत रहता है और दिमाग भी शांत रहता है।
- ऐसे मानसिक रोगों से दूर रहने के लिए हमेशा पौष्टिक आहार का हीं सेवन करें और पानी का सेवन भी अधिक मात्रा में करें इसके अलावा चाय,कॉफी के सेवन पर रोक लगाएं और नासिली पदार्थों जैसे कि धूम्रपान,शराब का सेवन बंद करें क्योंकि ये सारे चीजें डिप्रेशन को बढ़ावा देती हैं।
सारांश:
आज के इस युवा दौर में डिप्रेशन एक बहुत ही गंभीर समस्या उभर कर आई है। बहुत से अध्ययनों में यह बताया गया है कि आज के दौर में आधे से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं और अंततः वह दुखी हैं।
डिप्रेशन के बहुत से कारण हैं और इसका मूल कारण असंतुष्टि है। मनुष्य जब भी असंतुष्ट होता है, वह डिप्रेशन का शिकार होने की संभावना को जन्म देता है।
इस भयानक समस्या के बहुत से उपाय हैं को इस लेख में वर्णित हैं, अगर आप भी हमेशा दुखी रहते हैं और डिप्रेशन के शिकार हैं तो कृपया इन उपायों को अपनाएं और अपने जीवन और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखें।
