The 5 Kept Secrets Symptoms of Pregnancy In Hindi
गर्भावस्था एक ऐसा शब्द है जो केवल महिलाओं को ही नहीं पूरे परिवार को खुशी देता है। गर्भ अवस्था क्या है एक यह एक महिला से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। गर्भावस्था में बहुत स्त्री को इनके लक्षण के बारे में जानकारी नहीं होती है औेर सबको एक जैसा लक्षण भी नहीं होता है।
इसलिए कुछ महिलाओं को मुश्किल भी होती है। इसलिए मैं यह लेख में आपके लिए लेकर आई हूं। इससे आपको काफी मदद मिलेगी।
Symptoms of pregnancy in Hindi | 13 you have to know:
गर्भावस्था क्या है?
गर्भावस्था का मतलब है के की गर्व की अवस्था इस अवधि के लिए महिलाओं के गर्भ में एक शुक्राणु और अंडा मिलकर भ्रूण बनाते हैं जिससे गर्भावस्था की शुरुआत होती है धीरे-धीरे भ्रूण एक शिशु का रूप ले लेता है जो ।
महिला पहली बार मां बनने वाली होती है उन्हें यह पता नहीं होता कि किन-किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए और क्या-क्या करना चाहिए कई महिलाओं को तो यह प्रॉब्लम होती है कि वह प्रेग्नेंट है या नहीं।
कोई महिला प्रेग्नेंट है या नहीं यह जानने का सबसे सही तरीका प्रेगनेंसी टेस्ट ही है लेकिन पीरियड्स ना होने से पहले कुछ सामान्य लक्षणों का दिखना गर्भावस्था के पहले संकेत हो सकते हैं।
गर्भावस्था के लक्षण:
1. पीडीएस ना होना :
पीडीएस मिस होना इसका मेन लक्षण है पीरियड बंद होना ऐसा इसलिए होता है क्योंकि महिलाओं के गर्भाशय में अंडाणु और शुक्राणु मिलकर भ्रूण तैयार करते हैं ।
2. सांस लेने में भारीपन महसूस करना:
महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में सांस लेने में वैसा ही भारीपन महसूस होने लगता है जैसे की सीढ़ियां चढ़ते वक्त भारीपन महसूस होने लगता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट में पल रहे भ्रूण को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो उसे सांस के द्वारा मिलती है सांस लेने में परेशानी महिलाओं को पूरी गर्भावस्था के दौरान रहती है।
3. स्तनों में भारीपन महसूस होना:
गर्भावस्था के शुरुआती दिनों के दौरान स्तनों में भारीपन और उनके आकार में परिवर्तन नजर आता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्तनों में शिशु के लिए कब दूध तैयार हो रहा होता है।
4. उल्टी होना:
गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में अधिकतर महिलाओं को उल्टी की समस्या हो सकती है यह ज्यादातर एक महीने बाद शुरू होती है इसके साथ साथ चक्कर आना आने की शिकायत भी हो सकती है। लेकिन यह शिकायत 5 से 6 महीने बाद कम होने लगती लगती है।
5.थकान महसूस होना:
प्रेगनेंसी के वक्त हारमोंस में बदलाव होने के शरीर थक सा जाता है कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीने में सबसे ज्यादा थकान महसूस होती है और समय के साथ साथ में परिपक्व होने पर उनकी दिक्कतें बढ़ने लगती है।
6.अधिक पेशाब आना:
गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में जैसे-जैसे गर्भाशय बड़ा होता है तो मूत्राशय पर दबाव डालता है और पेशाब बार बार आता है
7. सिर दर्द:
गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में शरीर के हार्मोन में परिवर्तन आने के कारण सिर दर्द होता है।
8. पीठ में दर्द होना:
यदि आपको कभी भी पेट दर्द जैसी शिकायत नहीं रही है और अचानक से पीठ में हल्का हल्का दर्द महसूस होता है तो ऐसा गर्भावस्था के कारण हो सकता है
9.पेट में ऐठन होना :
यदि आप अपने पेट में ऐंठन महसूस करती हैं तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आप के गर्भाशय में बच्चे का आकार बढ़ने से आपके नसों पर खिंचाव हो रहा है। इसके वजह से आपके पेट में ऐंठन हो रहा है
10.खाने के प्रति अरुचि:
गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं को खट्टा खाने का मन करता है और सादे भोजन में अरुचि होने लगता है।
11. कब्ज की शिकायत :
डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान महिलाएं को आयरन और कैल्शियम की दवाई देते हैं जिस कारण कब्ज की शिकायत रहती है कब्ज की समस्या वैसे भी गर्भावस्था में हार्मोन में बदलाव के कारण भी हो सकता है।
12. स्वभाव में बदलाव आना:
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का स्वभाव पल भर में बदलता रहता है कभी बेहद खुश हो जाती है तो कभी अचानक उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है प्रेगनेंसी दौरान शुरुआती दिनों में मूड स्विंग होना नॉर्मल सी बात है।
13.ब्लैक स्पॉट:
यदि आपके पीडीएस के दिन नजदीक है और आप गर्भ धारण कर लेते हैं तो ऐसा मुमकिन है कि कभी-कभी आपको ब्लड स्पॉट काफी हल्का होता है इसको इंप्लांटेशन ब्लीडिंग कहते हैं।
गर्भावस्था में क्या क्या खाना चाहिए:
पौष्टिक आहार:
गर्भावस्था में गर्भवती महिला को यदि पौष्टिक व संतुलित आहार नहीं मिलता तो उसका गर्भवस्थ शिशु पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाएगा ।
आहार पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। गर्भवती का आहार ऐसा होना चाहिए जिसमें पौष्टिकता के सभी तत्व मौजूद हो।
प्रोटीन:
गर्भवती महिला को प्रोटीन भी संतुलित मात्रा में मिलना चाहिए। प्रोटीन अंडा, मांस, दूध आदि में अधिक होता है। और जो महिलाएं शाकाहारी है वह सोयाबीन व दालों से प्रोटीन प्राप्त कर सकती हैं। अंकुरित दालें मूंग, मोठ, चने आदि भी अधिक प्रोटीन उपलब्ध कराते हैं।
कैल्शियम:
गर्भावस्था में महिलाओं को कैल्शियम की बहुत आवश्यकता होती है। कैल्शियम दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ से प्राप्त कर सकती है।इसके अलावा पालक, बथुआ, मेथी, आंवला, गाजर, चौलाई और सोयाबीन में भी कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है।
धूप में बैठने या धूप में घूमने से प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त होता है। । विटामिन डी से शरीर में कैल्शियम की पाचन क्रिया संपन्न होती है।
आयरन:
गर्भावस्था में महिला को 40 मिलीग्राम आयरन की आवश्यकता होती है। आयरन मांस-मछली व अंडों से प्राप्त होता है। शाकाहारी महिला फल-सब्जियों से आयरन प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही विभिन्न दालों, अन्न, गुड़, अंजीर, खजूर और मेवों से भी आयरन प्राप्त किया जा सकता है।
पालक:
पालक में आयरन सबसे ज्यादा होता है। 100 ग्राम पालक प्रतिदिन आयरन की 25 प्रतिशत, विटामिन सी की 47 प्रतिशत और विटामिन के की 40 प्रतिशत की पूर्ति करता है। पालक की पत्तियों में विटामिन ए, फ्लेवोनॉयड और बीटा-कैरोटीन भी भरपूर मात्रा में होता हैं।
यह विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और फोलेट का भी अच्छा स्त्रोत है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह काफी उपयोगी है।
टमाटर:
यह विटामिन ए, सी, एंटीऑक्सीडेंट, अल्फा और बीटा कैरोटीन का अच्छा स्रोत होता है, जो हड्डियों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें विटामिन बी कॉम्प्लेक्स और कई मिनरल जैसे आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होते हैं। टमाटर में लाइकोपीन होता है, लाइकोपीन व एंटीऑक्सीडेंट महिलाओं के लिए गर्भधारण में काफी उपयोगी होते हैं।
चुकंदर:
कच्चा चुकंदर फोलेट का एक अच्छा स्रोत होता है। इसके प्रति 100 ग्राम में 109 माइक्रो ग्राम फोलेट होता है। फोलेट कोशिका डीएनए और आरएनए के निर्माण के लिए आवश्यक होता है। यह विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैरोटिनाइड और फ्लेवोनॉयड्स का अच्छा स्रोत है।
इसमें आयरन भरपूर होता है, जो गर्भवती महिलाओं में बच्चे के विकास में सहायक होता है। चुकंदर को सलाद के रूप में गाजर, मूली, खीरा और पत्ता गोभी के साथ कच्चा खाएं।
व्यायाम:
गर्भावस्था में सुबह-सायं पार्क में टहलने के लिए अवश्य जाए। सुबह-सुबह की शीतल शुद्ध वायु आपके शरीर में पहुंच कर आपको शक्ति व स्फूर्ति देगी और आपको तनाव से मुक्त रखें।
उपसंहार:
इसलिए, जब आपको यह लक्षण दिखाई देते हैं, तो यदि आप गर्भवती होना चाहती हैं तो आप दुनिया की सबसे खुश महिला हो सकती हैं। अगर आप खुश हैं तो कृपया अपनी जीवनशैली बदलें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
